कविता स्पर्श
Friday, 17 September 2021
Monday, 19 April 2021
Sunday, 18 April 2021
कौन ?
लामणदिवा
Tuesday, 9 June 2020
राह !
एक-एक दिन गायब रहते हो,
बताओ तो सही कहाँ रहते हो ?
गालिब के शेरों में,
या उमराव की अदा में,
होते कहाँ हो, डूबती हुई शामों में ?
आने की आहट, ना कोई डाक है तुम्हारी,
हवा से बकायदा दस्तक भी ना तुम्हारी !
ओढ़ती हूँ पश्मीना तो मलमल से याद आते हो...!
एक-एक दिन गायब रहते हो,
बताओ तो सही कहाँ रहते हो ?
नशा रखते हो इश्क का,
मयखाने तो नहीं लूटते ना ?
घूँट-घूँट उताकर,
दिल की बस्ती में तो नहीं बसते ना ?
बिखरकर निखरती हूँ मैं दुवाओं में अक्सर,
माँग बैठती हूँ तुम्हें "या खुदा" कहकर !
भूले भटके ही आना मेरी गली तुम,
किसी रोज़ ले जाना मुझे मौला-सा तुम !
जिधर जाते हो वहाँ की लहर भेज देना,
मलय-सी बेकरार कसक भेज देना !
यहाँ भी अकेला है बिन तुम्हारे कोई,
जरा थोडी ये बात जहन डाले देना !
तरसता है कोई तुम्हें देखने ऐ साहिब,
पल दो पल का सही, साथ ही भेज देना !
जहाँ रहते हो एक-एक दिन वो राह भेज देना !
____________Shilpa