Friday, 29 March 2019

रंजोगम

तुमने कहा था मुझसे,
बहुत जला हूँ, तभी तो शायर बना हूँ जान !
मुझे फिक्र होती है तुम्हारी___
कितना मलाल अंदर जमाए रखते हो ?
जिंदगी से कोई गिले-शिकवे नहीं___
ताज्जुब है___!
शायरों में ये हुनर कहाँ से आता है जी ?
खुद को पराया बनाकर,
गैरों को अपनाना____!

सुनो ! थक नहीं जाते तुम ?
अपनी ही दहलीज़ पर यूँ ठोकर खाते-खाते__
बस करो ना खुद को आजमाना___!
मैं हूँ ना____!
अपने दिल को मेरी गोद में रखो शायर !
मैं तुम्हारी____मेरी रूह भी तुम्हारी !
होंठों की आग से तुम्हारे दिल को छूनेवाला शोला हूँ मैं____!
देखो !
पिघलते मोम की तरह बह जाओगे !
यकीन मानो _____!
सारे रंजोगम मुझे दे जाओगे !

#Shilpa____

Monday, 18 March 2019

तुम्हारी चांदनी

#औरत____

तुम्हारा आना पक्का था,
पर पता नहीं कब ?
कल रात काफी देर कर दी आने में___
जानते हो तुम,
मैंने वजह नहीं पूछी तुमसे_____
क्योंकि वह चाँद रात थी मेरी___!

मेरा चाँद खिला-सा,
मासूम-सा मेरे सामने था____
प्यार लूटाने को जी करता था मेरा______!

पता नहीं तुमने कैसे पहचान ली,
इस मचलती चांदनी की प्यास____!

अपने लबों पर शरबती मिठास लाए थे तुम____हायsss !
हँस रहे हो ना ये पढ़कर ?

क्या करुँ इस चाँद पर
दिल जो आया है_____उफ्फ !

हाँ____!
तो कहाँ थी मैं___प्यास____जो अरसों से अधूरी____!

अपने लबों का हर घूँट तुम मुझे पिला रहे थे_____
मान लिया था तुमने____
बरसों प्यासी है ये कमबख़्त____!

बरसों प्यासे रहने का मतलब जानते हो तुम ?
इक-इक पल को रौंधती हुई एक ऐसी तड़प जो किसी औरत में होना गुनाह हो जैसे_____

देखो ना !
मैं बहुत बडी गुनाहगार हूँ तुम्हारी____
आजीवन रहूँगी____बेशक !
आखिर साँस तक_____

वादा रहा मेरे चाँद____!
सिर्फ और सिर्फ
________तुम्हारी चांदनी !

अल्ला हाफिज़ !

#Shilpa______

कड़वा सच

सुनो तो...!
मुझे ना ये इत्तर की खुशबू पसंद नहीं।
ये सिर्फ एहसास जवाँ करता है,
तुम्हारा मुझमें होना नहीं______

मेरा जिंदा होना तुमसे है___सुना तुमने !
तुम्हें जब लिखते देखती हूँ ना तब जी उठती हूँ बार-बार तुम्हारी हर अदा में_______!

मन करता है,
पीछे से कस कर पकड़ लूँ तुम्हें।
नहीं छोड़ना चाहती तुम्हारा साथ इक पलभर भी__________!

हाँ ! पर खूब लगते हो जब एक हाथ में कलम और दूसरे में तुम्हारी पसंदीदा सिगरेट एक साथ जल उठते है न_______तब !

तुम नहीं समझोगे, क्या गुजरता है अंदर ? कयामत____दिल बगावत कर बैठता है !

तुम्हारा कश....
वो कड़वा धुँआ....उफ्फ !
जैसे जलकर महक जाती हूँ तुम्हारे साथ_________उम्रभर के लिए !

जाना !
ये मेरी जिंदगी का कड़वा सच है
_________जान लिया ना !

बस अब तुम्हारा हर पन्ना मेरा हुआ....क्यूँ जी !

#Shilpa_____

सौदा

हद हो यार !
हाँ, नहीं तो____परेशान कर रख्खा है !
तुम्हें सोच-सोचकर पगला जाती हूँ ____!
क्या करुँ ?
काम करना छोड़ दूँ ?
पड़ जाएगी कलेजे में ठंड़क तुम्हारेsss !

हाथ का निवाला भी,
मुँह तक आने नहीं दे रहे तुम___
समझते हो या नहीं ?

माफ़ करो___पीछा छोडो !
थक गई मैं अब !
आँखें मूँद ली मैंने____

देखो तमाशा ! फिर आ गए !
बताओ अब भी काजल से चिपके हो !
हायssss ! क्या करुँ तुम्हारा ?

कल से एक सौदा Final____
मैं काज़ल लगाना छोड़ दूँ _____!
और तुम फौरन फिसलकर दिल में आना !

ना रहेगा बांस....ना बजेगी बासुरी ! ;-) ;-)

बोलो तो ?
सौदा पक्का....शायर ?

#Shilpa_____

चाँद

सजे मोगरे का जूडा खोल दूँ ?
महक जाओगी तुम भी____
जरा-सा छू लूँ ,
करीब तो आओ____!
उस बहाने सही !

कुमकुम का टिका माथे पर लगा दूँ ?
चमक उठोगी जाना___सुनो !
छू लूँ ना जरा_____
उस बहाने सही !

बडा हुनर है मुझमें देखोगी ?
__________
बिना शरारत झुमके पहना दूँ ?
मचल जाओगी बाहों में तुम भी____
छू लूँ थोडा_____?
उस बहाने सही !

ये आँखें है ना_______मृगनयनी !
वो मेरी जायदाद है समझी पगली !
कहीं काजल लगा दूँ इनमें तो_____?
तौबा____!
बिखरा दोगी मुझे तुम भी____
कहो छू लूँ थोडा____?
उस बहाने सही !

मैं सामने हूँ तुम्हारे_____
और रात बढ़ रही है ____जाना !
मान जाओ !
कहे देता हूँ____

उतर आओ इस चाँद की आगोश में____
उसकी चाँदनी बन सही !

छू लूँ न जरा____चाँद के बहाने सही !

#Shilpa_____

चुडै़ल

ऐसे-वैसे____
न जाने कैसे-कैसे___
लिखती रहती हूँ मैं रोज तुम्हें___?
परवाह है तुम्हें मेरी____कड़वे शायर !

देखो उस कमीनी को समझाओ____!
जिसके शौहर के हाथों में लिपटी रहती है
ना वो रातदिन !
उसकी बिवी के हुस्न को भी लिखा करें___!

हाँ नहीं तो____नोंच लूँगी चुडै़ल को !

;-) ;-) ;-)
#Shilpa_____

शायर कौन ?

एक पहेली है,
सुलझाओगे मियाँ____?

देखो___!
तुम जान लिखते हो___
मैं जान छिड़कती हूँ___

अब बताओ___हम में शायर कौन ? ;-)

#Shilpa___

नजर

आदत से बाज नहीं आओगे ना तुम !
ये प्यार करने का तरीका है तुम्हारा ?
आखिर चूम ही ली ना पलकें मेरी !

देखो नींद खुल गई___?
कह रही थी उसे भी चली जा___!
ये आते होंगे___पर नहीं__कलमुँही गई नहीं !
कहने लगी__शायर ने मुझे छुआ तो ही जाऊँगी____!

सुनो !
ये नींद ना___डोरे डालती हैं डोरे !
कहीं लेने के देने न पड़ जाएँ जी !
सँभले रहियो !____हाएssss!
उसे तुम पसंद हो,और तुम्हें मेरी आँखें !

हाँ ! एक और बात___
कोई सोते समय ना, प्यार नहीं करना चाहिए जी !
मेरी अम्मा कहतीं थीं______

दिवाने ! गर सच में मुझे नज़र लग जाती तो !
जिंदगीभर सोती रहती तो____
तब ऐसे ही चूमते रहते मुझे ?____
नौटंकी कहीं के ;-) ;-)

#Shilpa____

सुकून

उसने जनम तो देखो कैसा पाया है ?

पडी-पडी तुम्हें देख जलती है____
और जलाओ तुम,
तो फौरन होंठों से लिपटती है____
हायsssए !

ये कमबख़्त चीज़ क्या है ?
नशा है_____नशा____बस !

सुनो ना !
आज जला दो ना मुझे भी !
उस सिगरेट की तरह______!

कसम से____
ना कभी बुझूँगी___
ना कभी आदतन छुटने दूँगी____

बस____
कश पर कश____
मैं और तुम्हारे होंठ____

सुकून हो यारा_____!

#Shilpa____

जहर

सुनो !

कितना गुस्सा चढा रहता है____
उफ्फ् !

तड़तडाती सरसों के दाने____
उछलते देखें हैं कभी ?
वैसे उछलते हो तुम____!

क्या चाहते हो_____मुझसे ?
मेरे गरम तवे !
जला लूँ अपने आप को ?

मैं दूर जाऊँ तो गुस्सा_____
मैं सामने रहूँ तो गुस्सा_____
तुम्हें झाकूँ तो गुस्सा____
तुम्हें सहलाऊँ तो गुस्सा_____

नाक पे रहता है ये जालिम गुस्सा !

लिखते वक्त तुम्हें छू ना तो ___
आफत की बला____!

ओ मेरे दिवाने शायर ! सुनो ना !

चंदन पर भी साँप लिपटते हैं___

अभी भी मौका है____!
चंदन तुम्हारे सामने है_____

क्या कहते हो ?
जहरीले साँप !

ठंडा कर दूँ तुम्हें_____!

#Shilpa____

अल्लाहाफिज़

ये अटकना अजीब है !
पता है____अब बचूँगी नहीं !
सालों पहले अटकी थी ये जान
तब से तुम्हारे नाम कर दी थी !

देखो मिट रही हूँ आज,
हमेशा के लिए____!
मरने का खौफ़ नहीं है मुझे,
जानते हो ना तुम______!

मेरे गरम तवे !
मैं मरना नहीं चाहती !
तुम्हें खोना नहीं चाहती____!

मेरे शायर !
तुम्हारी शायरी में मेरा कोई तो इलाज होगा ?
याद करो___कहीं कुछ लिखा होगा तुमने ?

मुझे जीना है दीवाने !
तुम्हारी बनकर____
हर पल____!
करीब____और करीब !

एक बार कागज़-कलम से दूर,
तुम मेरे बने होते मौला !
मेरी हर दुआ में चुमती तुम्हें___!

बाहों में ले लो___!
नज़दीक___और नज़दीक_____
वक्त इजाज़त ले रहा है मुझसे !

हाँ, जाते-जाते एक और बात___!

तुम्हारा वह सफेद शर्ट____
अलमारी में बराबर सामने है___
वो निशानी है तुम्हारे जिस्म होने की,
मेरे लिए______!
गुस्सा होते थे ना___!
तब वो सफे़द जिस्म मेरा हुआ करता था___
खूब लिपटकर उसे मना लेती थी मैं,
जैसे सच में तुम्हें मना रही हूँ !

बात सुनो !
मरते की ख़्वाहिश पूरी करोगे ?
उस सफे़द जिस्म को मेरा कफ़न बना दोगे ?______

हकीकत में ना सही,
कबर में तो मुझसे लिपटे रहोगे___?

मना न करना शायर !
चूम लो मुझे_____मौला !

अल्लाह हाफिज !

#Shilpa____

आशिक

इतनी भी अदा से मत देखो मुझे__
मिजाज बदलते हैं मेरे___
समझे मेरे चिड़चिडे़ आशिक !

बाहों में भर लिया है,
तो एक बात कहूँ____जी !
बाहर चलते हैं कहीं ?____मूड है आज !

लफ़्जों की लेन-देन से,
जो दाद मिली थी ना तुम्हें___याद है ?
उसी से एक गहरे हरे रंग की साडी लाए थे तुम मेरे लिए_____
मन करता है वहीं पहनकर निकलूँ तुम्हारे साथ____इश्क जो है तुमसे मियाँ !

आज आते वक्त मोगरा लाए थे तुम ?
हाँ लाए ही थे ! महक जो गई थी तुम्हारे आते ही मैं____
हररोज की तरह उन उँगलियों से ही मेरे जुडे़ में सजाना जी !
जिसमें कमीनी सिगरेट,
और उस चुडै़ल को पकड़ते आए हो____!

देखो, गुस्सा नहीं होना...हाँ !
चुडै़ल है____तो बस है वो !
तुम्हारी उँगलियों में कैद होकर,
पता नहीं तुमसे क्या-क्या लिखवाती रहती है ?
बस___इधर-उधर की पंचायतों-भरा इश्क !
बेक्कार कहीं की !
बडी तोफ़ बनी फिरती है कागज़ पर !

हाँ तो बताओ ?
सांझ ढलते ही चलेंगे ?
मुझे कुछ नहीं चाहिए____जी !
भुट्टा,मूँगफलियाँ,चाट_____कुछ भी नहीं !
बस एक करारी....किस की भूख है जनाब !

यूँ निगाहों में हँसना बंद करो____इश्किए !
शरम से रहा नहीं जाता फिर___
तुम्हारे इन काले होंठों को पिना है___
मेरे ज़हरीले साँप !

तुम्हारा ये काला ज़हर,
सबूत है मेरे बिखकर जीने का !
हक़ से मरना कबूल है मुझे____
सिर्फ तुम में____!

आओ चलें____
मेरी बक-बक में सांझ हो भी गई___मेरे आशिक !

#Shilpa____

नवाब

सफेद कुर्ते में मियाँ !
   बडे़ करारे लगते हो...
रातभर की सिलवटें मुझे देकर,
   खुद नवाब बने बैठते हो..

:-D :-D :-D
#Shilpa____

सबक

गद्दे की रुई,
एक दिन लड़ पडी मुझसे,
बताओ ?___
कौन तुम्हें सबसे ज्यादा चुभता है ?
तुम्हारे मियाँ की मुँछें या मैं___?

मैंने शरमाकर तुम्हारा ही एक शेर सुना दिया उसे___!
जो तुमने मेरे होंठों को छूकर लिखा था !

बस ! फिर क्या ?
कमबख़्त वहीं घायल हो गई !

____इसे कहते हैं___चुभना !
सबक मिला ना जी ! 😜

#Shilpa__

पगली

शाम पाँच बजे का वक्त,
बेकरार-सा कहता है मुझसे...
घंटेभर में मोगरा दस्तक देगा....हाँ___!
जूडा बाँध लो,
सिंदूर लगा लो,
माँग तो सजा लो ना अब____!

वो आकर लिपटेगा बहुत___
सिमटी रहना___समझी पगली !

#Shilpa___

रजाई

रजाई-सा गर्म है तुम्हारा हाथ !
कब ओढ़ लिया...
कब आँख लगी...
   पता ही नहीं चला !

#Shilpa

बेशरमी

उस कागज़ पर थोडा तो तरस खाओ,
घुमा लो ना अपनी नजरों को तुम,
बंद करो लिखना अब,
सहमता है वो तीर-ए-नजर से..!
   
    मुझे लिखने की जिद करते हो,
    पता नहीं कितनों को तड़पाते हो...
    अच्छा लगता है क्या ?
    हम दोनों का इश्क,
    यूँ कागज़ पर उतारना ।
         बेशरमी की हद हो तुम...!

बेचारा शरम से चूर-चूर हो गया अब
बस भी करो ना,
मुझे चूम-चूम कर लिखना अब...!

#Shilpa

मसला

मसला ये हुआ
कि तू मेरा न हुआ...!

सरका दो ये रजाई अब,
कमबख़्त परेशाँ करती है...
लिपटके तुम को हमेशा,
ये मुझे ताना मारती है...
कहती है....
'देख ! चुरा लिया ना !
मैंने तुमसे तुम्हारा ही...वो ! 😜

बाज आओ तुम भी अब,
कहे देती हूँ बस !
वरना लपेट के उसको पूरा,
कहीं छोड़ आऊँगी अब...

सौतन होगी पिछले जनम की मेरी,
जो इस जनम छिनेगी मुझसे सब...
किस तरह गुजारुँ ये ठंड,
जब साथ होकर भी तुम,
मेरे न हुए अब...

पता है क्या कहर होगा अब ?
पूरा दिसंबर ये तुमसे लिपटी,
सारा जनवरी फिर तुमसे लिपटेगी,
सोचा, फरवरी तो मुझसे लिपटोगे,
पर कमिनी...😜
सारी हद पार कर देगी अब !

😜😜😜
समझे बुद्धू !
मसला ये हुआ
कि तू मेरा न हुआ अब !

#Shilpa....

मोगरा

तुझं ते अधीर होऊन,
        घास भरवणं
माझ्या ओठांना,
        तुझ्या बोटांचा स्पर्श होणं...

काय वाटतं तुला...?
       कळत नाही का मला...?

मनातला प्रत्येक भाव,
       मी ओळखणं...
तू काहीच,
       न झाल्याचं दाखवणं...

तुझ्या हर नख-यात,
      मी मला शोधणं...
तू मात्र नव्याने,
      स्वतःत हरखणं...

बस कर ना आता...!
   किती त्रास देशील ?
        स्वतःला अन् मला देखील...

आण तो मोगरा अन् 
   घे अजून एक कारण
      मला स्पर्शून जाणारं...
        तो मोगराही खूश अन् तूही...

भान हरवून निघताना तू
   अडचण स्वतःचीच करशील...
मोगरा असेल त्याच्या जागी...अरे !
   तू काही तुझा नसशील...
         तू काही तुझा नसशील....!

#Shilpa...

निशाँ

बहा दिया है मैंने तुम्हें कतरा-कतरा,
अब मुझमें तुम्हारा नामों-निशाँ नहीं..!

#Shilpa...

सच

सच बात है,
    समझा करो...
बन गए हो मेरे,
    कबूल करो...

#Shilpa

दिवानगी

कौन हो ? क्या हो ?
नहीं पता..बस एक दिवानगी हो !
जो हमेशा सिर चढी रहती है !

#Shilpa

वो

वो छोड़ गया मुझे,
बस अफ़सोस ये रहा,
बेचारा नर्म हाथों को तरस गया...

#Shilpa

Tuesday, 12 March 2019

आहिस्ता

बंद दरवाजे पर,
दस्तक देना कभी....!
'मिलने आया हूँ जान तुम्हें'
फ़कत इतना कहना कभी...!

हो सकता है कि,
पलकें चुप हो मेरी...!
पर चेहरा उठा के,
माथा मेरा चूमना कभी...!

चूमो भी इस कदर आहिस्ता,
न लबों को पडे़ भनक,
कि तुम आए थे कभी...!

😜 #Shilpa

पाणी

माझा तळ्यातला पावलांचा चाळा,
खूप आवडतो ना तुला....!
पाणी कित्ती नशीबवान,
असं वाटतं तुला....!
दिवसा ही स्तुती तुझी,
वाटत नाही रे खरी....!
रात्री चांदण्यात,
मी मात्र चिंब पूरी....!

;-) ;-)
#Shilpa___

तुम

#तुम___

तुम्हारे अंदर जो धड़कता-सा टुकडा है ना !
वो बहोत गहरा है__
बिल्कुल खारे समुंदर जैसा___
तेज़ लहरें उठती हैं उसमें ज्वार की !

मन करता है उतर आऊँ उसमें___
जी भर गोते लगा लूँ कईं एक___
बस डूबते-तैरते रहूँ___!

शायर हो खूबसूरती का नशा तो पैदायशी होगा !

तुम्हारा तन किसी शालिग्राम से कम नहीं जी !
तपीश इतनी कि झूलस जाऊँ मैं उस लूँ में__!

ये लंबी बाहें मानो,
हरदम मुझसे लिपटने को तैयार हो___!

आँखों का वो तेज़ गहरापन,
मार देता है मुझे___!
कितने कातिल देखोगे और ?

लंबी,तेज़-तर्रार नाक,
जिसके गुरुर से कटता है मेरा हर अंग___!

क्या लगता है तुम्हें___?
सुंदरता का बखान सिर्फ़ तुम कर सकते हो____!
क्या मैं तुम्हें नहीं लिख सकती ?

सारी जिम्मेदारियों से भरी वो चौडी छाती___!
वल्लाह____!
सिर रखूँ तो इश्क चिर दे____इतनी करारी !

हर उँगली जैसे कयामत हो___
कलम जिस किसी में पकडो,
शायरी अपनेआप बोल पडे़__!

सुनो !
लगा आऊँ एक गोता उस धड़कते टुकडे़ में___?
नाक मुँह बंद कर पडी रहूँ उस ज्वार में____
जिसे तुम दिल कहते हो__!

मर भी गई तो भी तुम्हारी___!

#Shilpa___

शहद

दिन में कितनी शायरी लिखते हो जी___?
कहाँ से लाते हो लफ़्जों को ?
हर एक में मुहब्बत कूट-कूटकर भर देते हो !

कितनों की प्यास बुझाते हो,
पता भी है तुम्हें__?

तुम्हें पढ़ते ही रोमांस जागता है जी !

पर एक बात है जरुर !
जब मेरे करीब आते हो___
हाएsss ! कमाल के कड़वे लगते हो___!
तुम तो जानते हो मेरी मिठास ?
शहद हूँ शहद____!

खुदाया !
भला हो उस सिगरेट का,
जो तुम में कड़वापन छोड़ जाती है !
कमसकम सारी रात तुम्हें तो डुबाए रख सकती हूँ ______शहद में ! ;-)

😜😃

#Shilpa

Friday, 8 March 2019

लेन देन

कुछ माँगने आए हो क्या ?
कहो भी__?
आज़मा रहे हो मुझे ?

कड़वे ! सामने यूँ बूत बनकर ताँकना नहीं मुझे___
इतने मासूम,भोलेभाले तो हो नहीं तुम__!

ओss फरेबी !
शराफ़त तो तुमसे कोसों दूर है जनाब __!

अयss ! शायरी की दुकान !
बकोगे भी या सीधे लबों से टकराओगे____?

मुझे तो लेन-देन बहोत पसंद है 😜

#Shilpa