#तुम___
तुम्हारे अंदर जो धड़कता-सा टुकडा है ना !
वो बहोत गहरा है__
बिल्कुल खारे समुंदर जैसा___
तेज़ लहरें उठती हैं उसमें ज्वार की !
मन करता है उतर आऊँ उसमें___
जी भर गोते लगा लूँ कईं एक___
बस डूबते-तैरते रहूँ___!
शायर हो खूबसूरती का नशा तो पैदायशी होगा !
तुम्हारा तन किसी शालिग्राम से कम नहीं जी !
तपीश इतनी कि झूलस जाऊँ मैं उस लूँ में__!
ये लंबी बाहें मानो,
हरदम मुझसे लिपटने को तैयार हो___!
आँखों का वो तेज़ गहरापन,
मार देता है मुझे___!
कितने कातिल देखोगे और ?
लंबी,तेज़-तर्रार नाक,
जिसके गुरुर से कटता है मेरा हर अंग___!
क्या लगता है तुम्हें___?
सुंदरता का बखान सिर्फ़ तुम कर सकते हो____!
क्या मैं तुम्हें नहीं लिख सकती ?
सारी जिम्मेदारियों से भरी वो चौडी छाती___!
वल्लाह____!
सिर रखूँ तो इश्क चिर दे____इतनी करारी !
हर उँगली जैसे कयामत हो___
कलम जिस किसी में पकडो,
शायरी अपनेआप बोल पडे़__!
सुनो !
लगा आऊँ एक गोता उस धड़कते टुकडे़ में___?
नाक मुँह बंद कर पडी रहूँ उस ज्वार में____
जिसे तुम दिल कहते हो__!
मर भी गई तो भी तुम्हारी___!
#Shilpa___
No comments:
Post a Comment