Wednesday, 24 July 2019

मुराद

या खुदा !
मेरी मुराद पूरी करना !
इन्हें उम्रदराज़ करना !
मुझे इश्क निभाना है___!

#Shilpa___

होली

मुझे होली पसंद है !
बडे़ प्यारे लगते हैं ये रंगीन रंग !
रंगों को रंगीन कहा तो हँस गए शायर___!
तुम जैसा कातिल लिख नहीं सकती ना___!
क्या करुँ ?
एक बात कहूँ जी ?___
देखो हँसना नहीं फिर से ____
मुझे ना तुम्हारा रंग पसंद है___काला !
बिल्कुल अपना लगता है__हक से !
जँचता है जी मुझपर____!
मुहल्लेवाली कहती है___
रातभर मियाँ ने कितने रंगों में डुबोया है तुम्हें____
हया से मर जाती हूँ जी मैं !

अब इन्हें कौन बताए ?
कि मुझे तुम्हारे काले रंग में डूबना आता है_____
इतने सालों जो साथ रही हूँ इस काले के 😉

कमिनियों ने फँसा दिया मुझे !
बताओ मेरे काले है कोई जवाब ?

बुरा ना मानना जी होली है !

;-) ;-) :-D

Happy Holi !

#Shilpa___

ठौर

भाँता है मुझे तुम्हारे बालों को सहलाना___
अपनी लंबी उँगलियों को उनमें यूँ फँसाना,
जैसे हर रात मैं तुम में___!
देर रात तक लिखने बैठते हो दुनिया की फिलोसॉफी___
तब गर्म कॉफी के मग को तुम्हारे सामने रख,
उन्हीं हाथों से तुम्हारे बालों में उँगलियाँ फेरना___
बहुत भाँता है मुझे___
तुम्हें तुम से चुराने का मजा कुछ और है शायर !
पलभर के लिए तुम्हारा ध्यान हटता जरुर है !
जब वहीं उँगलियाँ तुम्हारे लबों से होकर गुजरती हैं तब,
शायद वो मेरे होने का एहसास दिलाती हैं तुम्हें___
आहिस्ता-आहिस्ता कलम रुक जाती है,
तुम्हारा चश्मा उतर आता है,
कॉफी भी गर्माहट से दम तोड़ देती है____
पर बढ़ती रहती हैं तो सिर्फ मेरी उँगलियाँ____
जिन्हें अपना ठौर हासिल करना है,
हर रात____!
इसी तरह____!
इसी हरकत से____!

❤❤❤
#Shilpa___

अभिषेक

तुझं रात्रीचं रुप____
खल्लास करतं रे !
इतकं रोमँटिक नको ना बघूस,
जीव कचकन् जातो रे !
करावंच लागतं प्रेम मग,
इलाजंच नसतो दुसरा !
काळ-वेळ न बघता,
मांडावीच लागते मूर्तीपूजा !
बरं, मूर्ती तुझी मांडली म्हणून,
शांत थोडाचं बसणार तू !
"कर ना गं अभिषेक"
नजरेतून हेच सांगणार तू !
ओल्या केसांना झटकून मी,
केला जरी अभिषेक तुझा !
कसला गोड दिसतो रे,
तेव्हा जबरा ओठ तुझा !
टपो-या थेंबांतून तू,
न्हाऊन निघतोस पार !
तेव्हाच अगदी बरोबर,
ऊतू जाते ओठांची धार !
कित्ती आवरुन ठेवले तरी,
बावरतातच रे ते!
दिवसा धरलेला उपवास तुझा,
रात्रीच सोडतात रे ते !

#Shilpa___

😉😉😉

अमलतास

तुम्हें खुद से मिलना है ?
तो चले आना मेरे अंदर____
कुछ दाग़ होंगे हम दोनों के सफर के____!
रातें होंगी उन दागों को हलका करनेवाली,
गर वो न दिखें, तो मन की ओर मूड़ लेना___
सिलवटें होंगी जो तुमने दी थी,
कर लो मुलाकात उनसे____!
काश उधर ही कहीं मिल जाओ खुद से____!
मेरे पल्लू की चुन्नट भी लहराकर आवाज़ देगी तुम्हें,
पहचानो उसे भी____!
एक गली भी होगी___वहाँ__!
जहाँ बैठ चूमते थे हम एक-दूसरे को,
और ज़माना जलता था हम पर !
देखो मिले खुद से या नहीं ?

अदरकवाली चाय भी,
उधर ही मिलती थीं आगे नुक्कड़ पर___
मुझे अदरक का स्वाद पसंद नहीं,
पता है क्यूँ ___?
तेजा़ब जो पी चुकी हूँ___!

अमलतास भी खूब लटकता था तुम्हारी ओर_____!
छलिया था वो___!
उसी की छाँव में बैठ,
मेरे सीने पर हाथ रख,
तुमने गली को नाम दिया था-'इशक़पुर'_____!
देखो सीने पर अब भी निशान दिखेंगे पंजों के___
बस मिला लो अपने हाथों से___
पल में पहचान होगी और सीना धड़केगा जी____!
मिल जाओगे वहीं खुद को____पक्का___!

तब समझ जाओगे,
मैं क्यूँ कहती हूँ___
कि तुम मुझमें बसते हो जी !

#Shilpa___

तुम और चाय

सामने चाय रखी है___!
तह जमी है जी उस पर____!
बिल्कुल तुमसे मेल खाती__काली साँवली !
उसे देख,
तुम्हारा रातवाला रंग याद आता है मुझे___

हाएss ! सुरररर्र के पीने का दिल करता है !

जैसे हर रात,
मैं तुम्हें पीती आई हूँ ना !
ठीक वैसी एक चाय की चुस्की___!

वल्लाह !
तबियत बना देती है ये रात मेरी !

;-) ;-)

#Shilpa___

फजीता

दुनिया भड़काए तुम्हें,
और तुम भड़क जाओ मुझ पर___!
ये कहाँ का इन्साफ़ है जी !
कल की ही बात देखो____!
प्यार से बोल रही थी ना मैं___
पर तुम खौल उठे___!
कह दिया तुरंत____फ़जीता मत करो !

कर लो बात !
गर तुम्हारे मुँह लगती ना,
तो अफ़साना कुछ और बनता____!

बेसूर बांसुरी को,
एक सुरीला सूर मिलता___!

समझे के नहीं ? ;-) ;-)

#Shilpa___

पगली

शाम पाँच बजे का वक्त,
बेकरार-सा कहता है मुझसे...
घंटेभर में मोगरा दस्तक देगा....हाँ___!
जूडा बाँध लो,
सिंदूर लगा लो,
माँग तो सजा लो ना अब____!

वो आकर लिपटेगा बहुत___
सिमटी रहना___समझी पगली !

#Shilpa___

काला गहना

मैं प्यार करती हूँ तुमसे शायर !
बेपनाह इश्क है तुमसे !
तुम्हारे फैले कागजों की कसम !

आती हर रात,
हम दोनों की है !
तुमसे अलग तो,
जान भी नहीं जाती है !

इस बीच एक रिश्ता,
हरदम डोला करता है !
तुमने बाँधा मेरे गले में,
जाने क्यूँ ये इतराता है ?

कड़वी गर्म साँस तुम्हारी,
गर्दन मेरी महकाती है !
पता नहीं इस कमबख़्त को,
क्या जन्नत नसीब होती है ?

कहता है तब खूब तन के,
देख मैंने उसे लाया है !
महके इतर का फाहा वो,
खूब डुबोकर लाया है !

खुले सीने पर जैसे मेरे,
रखवाली वो करता है !
हर रात मुझे बेफिक्री से,
तुम्हें सौंप वो देता है !

गोरे गले पर काला गहना,
जाने क्या गुल खिलाएगा ?
तेरी बाहों की तलवार ये,
मुझपर हमेशा चलाएगा !

😜😜😜

#Shilpa___

मतलबी कड़वे

कितने बचर-बचर करते हो उन कागजों के साथ____?
क्यूँ तड़पकर हलक से पुकार रहे हो मुझे___?
इतनी प्यास लगी है मेरी___?

इक बात बताओ___?
उस निकम्मी के साथ तो____
घंटों लगे रहते हो___!
जब हाथ, मुँह दर्द करता है___
तब जान याद आती है___!

जान ! हाथों में बाम लगा दो__!
गर्दन उठाए नहीं बन रही जरा दबा दो__?
लबों को छूकर छालों को शहद तो चटा दो___जान !

हायsss ! अदाएँ तो देखो तुम्हारी ? झूठे__

अरे मेरी मत मारी गई है जो शहद चटाऊँ तुम्हें___?
हो तो तुम कड़वे ही__
एक नंबर के मतलबी कड़वे !

समझे तुम !
हाँ ! और रही बात लबों को छूने की तो___!

उसका ठेका तो मैंने ही लेना है__बस !

😂😂😂😂😉😉

#Shilpa___

तुम....आप

सुनो !
तुम्हें 'आप' बुलाते-बुलाते
गर मैं 'तुम' पर उतर आऊँ...
तो तुम भी 'इश्क' पर चढ़ आना.. 😂😂😉

#Shilpa___

सब्र

तुम सब्र हो, मैं बेसब्र हूँ.....!
जरा मेरी बेसब्री लेकर देखो !

❤❤

#Shilpa___

उल्लू

इन कंधों के तट पर,
तुम्हारे प्यासे लब जानलेवा हरकत करते हैं___!
तुम प्यास बुझाने आते हो,
या प्यास जगाने ?
अच्छा ! बीच में रुकावट भी पसंद नहीं तुम्हें !
क्यूँ खिंचा-तानी करते हो उस पल्लू की भी ?
सीधे बाहें थामो,
और भिगो लो न लबों की प्यास !

फिर देखो !
कैसे सरररररर्र से सरकता है ये पल्लू !
बिना कुछ कहे अपने आप____!
आज़मा रहा है वो तुम्हें पगले !
तुम्हारी तरह जिद्दी है वो,
ठान ली तो बस ! ठान ली !
इसमें फँसती तो हमेशा मैं ही हूँ जी !
पल्लू सरके फिर भी,
और ना सरके फिर भी___!

अरे मेरे दिवाने मियाँ !
बिना जिद किए देर रात,
तुम्हें अपनी आड़ में भी वहीं छुपाता है !

शरमाओ नहीं,
पर इससे पंगे न लिय्यो शायर !
ये पल्लू, बडा उल्लू है !
समझ जय्यो हाँ !

😉😉😄

#Shilpa___

Monday, 22 July 2019

पल्लू

तुम लेटते हो मतलब !
पसार देते हो अपनेआप को बिस्तर पर !
तभी मेरे पल्लू का एक छोर,
तुम्हारी पीठ पीछे फँस गया_____
अब मैं उठना चाहूँ भी तो कैसे ?
खींचना चाहा,
तो मैं ही घिर आईं तुम्हारी पहलू में ___

हायsss !
जालिम मेरे गालों ने तुम्हारा सीना छू लिया !
फिर क्या था !
अधखुले बदन तुम्हें सोते देखूँ तो रहा नहीं जाता___
बस तो मुझे प्यार आना ही था तुम पर शायर____!

तुम्हारा सीना इतनी धक्-धक् क्यूँ करता है जी ?
शायद मेरे छूने से मचलता है___
सहला लिया उँगलियों से उसे,
पर शरमा गया बेचारा____
जैसे कहता हो,
"मत करो हरकतें !
कहीं तुम्हारे वो जाग न जाए,
इन चुलबुलियों को रोक लो,
नहीं तो शायर काट खाए____!"

सारी मर्यादाओं से परे था मेरा बदन !
लगता था,
जाग जाओ तुम अभी, इसी वक्त,
और मैं सारी रात मरती रहूँ इस चौडे़ सीने पर !

पल्लू का एक छोर क्या फँसा शायर,
मैं तो पूरी फँस गई तुम में_____!

#Shilpa___

Friday, 19 July 2019

आँच

तुम्हारी गर्म आँच से मैं भी झुलसती हूँ !
सच कहूँ...?
इक तो ये काला रंग और कमाल का गर्म मिजाजी वो लाल रंग___
कॉम्बिनेशन ही तगडा बनाया है उपरवाले ने तुम्हारा_____!

क्यूँ करते हो अपने आप को इतना गर्म ?
पुछूँ तो कह देते हो___ तुम्हें देखकर !
मन करता है,
उँगलियाँ भींच दूँ जुल्फो में और कसकर खींच लूँ तुम्हें !

तब मेरा मन भी आपे से बाहर टूटने लगता है,
मन की बात बताऊँ शायर !
यहाँ किसे अकेले तड़पना भाँता है ?
फिर हो लेती हूँ तुम्हारी बाँहों की संगिनी !

तुम्हारी साँसों का यूँ जोर-जोर से मुझे बुलाना,
बहा ले जाता है मेरे बदन को उस ओर,
जहाँ अग्रीम क्षण अपना हो !
मिलना है हमें ऐसे उत्कट पल में,
जहाँ गरमाते हम दोनों पनप रहें हों,
अपनी-अपनी जडों समेत एक-दूसरे में_____

इस बीच शरारतें तो वाजिब है जनाब !
जो होठों से की जाए____!
शहद से भरे हम उँडे़ल दें उस अमृत को,
जो तन-मन से भिगता इक-इक बूँद टपकाए !

यहीं प्यार का अंतिम क्षण,
जो जिलाए रखता है हमें बार-बार !
फ़कत इक बार फिर से जान लूँ मैं भी ?
ये गरमाहट कहाँ से लाते हो तुम ?
तुम्हें देखकर न कहना जी !

सौ गुनाह मुआफ़ हो सकते है पर ये एक कभी नहीं !
सच बताना शायर !
_____ झूठ बिल्कुल नहीं !

#Shilpa____