इन कंधों के तट पर,
तुम्हारे प्यासे लब जानलेवा हरकत करते हैं___!
तुम प्यास बुझाने आते हो,
या प्यास जगाने ?
अच्छा ! बीच में रुकावट भी पसंद नहीं तुम्हें !
क्यूँ खिंचा-तानी करते हो उस पल्लू की भी ?
सीधे बाहें थामो,
और भिगो लो न लबों की प्यास !
फिर देखो !
कैसे सरररररर्र से सरकता है ये पल्लू !
बिना कुछ कहे अपने आप____!
आज़मा रहा है वो तुम्हें पगले !
तुम्हारी तरह जिद्दी है वो,
ठान ली तो बस ! ठान ली !
इसमें फँसती तो हमेशा मैं ही हूँ जी !
पल्लू सरके फिर भी,
और ना सरके फिर भी___!
अरे मेरे दिवाने मियाँ !
बिना जिद किए देर रात,
तुम्हें अपनी आड़ में भी वहीं छुपाता है !
शरमाओ नहीं,
पर इससे पंगे न लिय्यो शायर !
ये पल्लू, बडा उल्लू है !
समझ जय्यो हाँ !
😉😉😄
#Shilpa___
No comments:
Post a Comment