Wednesday, 24 July 2019

अमलतास

तुम्हें खुद से मिलना है ?
तो चले आना मेरे अंदर____
कुछ दाग़ होंगे हम दोनों के सफर के____!
रातें होंगी उन दागों को हलका करनेवाली,
गर वो न दिखें, तो मन की ओर मूड़ लेना___
सिलवटें होंगी जो तुमने दी थी,
कर लो मुलाकात उनसे____!
काश उधर ही कहीं मिल जाओ खुद से____!
मेरे पल्लू की चुन्नट भी लहराकर आवाज़ देगी तुम्हें,
पहचानो उसे भी____!
एक गली भी होगी___वहाँ__!
जहाँ बैठ चूमते थे हम एक-दूसरे को,
और ज़माना जलता था हम पर !
देखो मिले खुद से या नहीं ?

अदरकवाली चाय भी,
उधर ही मिलती थीं आगे नुक्कड़ पर___
मुझे अदरक का स्वाद पसंद नहीं,
पता है क्यूँ ___?
तेजा़ब जो पी चुकी हूँ___!

अमलतास भी खूब लटकता था तुम्हारी ओर_____!
छलिया था वो___!
उसी की छाँव में बैठ,
मेरे सीने पर हाथ रख,
तुमने गली को नाम दिया था-'इशक़पुर'_____!
देखो सीने पर अब भी निशान दिखेंगे पंजों के___
बस मिला लो अपने हाथों से___
पल में पहचान होगी और सीना धड़केगा जी____!
मिल जाओगे वहीं खुद को____पक्का___!

तब समझ जाओगे,
मैं क्यूँ कहती हूँ___
कि तुम मुझमें बसते हो जी !

#Shilpa___

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