Wednesday, 24 July 2019

ठौर

भाँता है मुझे तुम्हारे बालों को सहलाना___
अपनी लंबी उँगलियों को उनमें यूँ फँसाना,
जैसे हर रात मैं तुम में___!
देर रात तक लिखने बैठते हो दुनिया की फिलोसॉफी___
तब गर्म कॉफी के मग को तुम्हारे सामने रख,
उन्हीं हाथों से तुम्हारे बालों में उँगलियाँ फेरना___
बहुत भाँता है मुझे___
तुम्हें तुम से चुराने का मजा कुछ और है शायर !
पलभर के लिए तुम्हारा ध्यान हटता जरुर है !
जब वहीं उँगलियाँ तुम्हारे लबों से होकर गुजरती हैं तब,
शायद वो मेरे होने का एहसास दिलाती हैं तुम्हें___
आहिस्ता-आहिस्ता कलम रुक जाती है,
तुम्हारा चश्मा उतर आता है,
कॉफी भी गर्माहट से दम तोड़ देती है____
पर बढ़ती रहती हैं तो सिर्फ मेरी उँगलियाँ____
जिन्हें अपना ठौर हासिल करना है,
हर रात____!
इसी तरह____!
इसी हरकत से____!

❤❤❤
#Shilpa___

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