मैं प्यार करती हूँ तुमसे शायर !
बेपनाह इश्क है तुमसे !
तुम्हारे फैले कागजों की कसम !
आती हर रात,
हम दोनों की है !
तुमसे अलग तो,
जान भी नहीं जाती है !
इस बीच एक रिश्ता,
हरदम डोला करता है !
तुमने बाँधा मेरे गले में,
जाने क्यूँ ये इतराता है ?
कड़वी गर्म साँस तुम्हारी,
गर्दन मेरी महकाती है !
पता नहीं इस कमबख़्त को,
क्या जन्नत नसीब होती है ?
कहता है तब खूब तन के,
देख मैंने उसे लाया है !
महके इतर का फाहा वो,
खूब डुबोकर लाया है !
खुले सीने पर जैसे मेरे,
रखवाली वो करता है !
हर रात मुझे बेफिक्री से,
तुम्हें सौंप वो देता है !
गोरे गले पर काला गहना,
जाने क्या गुल खिलाएगा ?
तेरी बाहों की तलवार ये,
मुझपर हमेशा चलाएगा !
😜😜😜
#Shilpa___
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