Thursday, 28 November 2019

Aks

ये कैसी होड़ है इश्क की,
जो मुझे मिलने बुला रहा है....!
कहता है, उसे तुम्हारी आँखों में
मेरा अक्स दिखता है....!

Saturday, 16 November 2019

आपलं

तुझंच सगळं तुला देताना,
किती भारी वाटतं रे...!
राहत नाही काहीच तुझं-माझं,
सारं आपलं होऊन जातं रे....!

#Shilpa___

Monday, 4 November 2019

गहिवर

गहिवरले मी,
की पापण्या मिटून घेते...
आतल्या आत तुला बिलगून,
मनमोकळं रडून घेते...

#Shilpa___

रात और तुम

रात और तुम___महकती मैं !
शांत है आज आसमान___!
बादलों की गूँज नहीं और ना ही दामिनी की दमक !
घोर अँधियारा और हल्की मलय पवन !
अपने मिलन के लिए इतनी सजावट बहुत हुई ना ?
तुमने दी थी ना धानी साडी,
आज वहीं ओढ लूँगी,
क्योंकि धाना रंग तुम्हारी पसंद है___!
आखिर इसे भी खींच तुम ही लपेटोगे पता है मुझे !
ये मुझ पर टिकेगी नहीं,
देखा हँस दिए ना__बेहया कहीं के !
इसलिए कहती हूँ,
"पहनूँगी नहीं फ़कत ओढ़ लूँगी__"
माथे पर बडा-सा लाल कुमकुम,
और गले में तुम्हारे नाम का मंगलसूत्र !
बस ना ! तुम ही कहते हो,
तुम सिंपल और सोबर अच्छी लगती हो !
आज बिल्कुल वैसा होगा, जैसा तुम चाहो !
पता है, जुडा बाँधना ही होगा,
तुम्हारे मोगरे के लिए बावली जो हूँ !
कभी लगता है सारे जेवर पहन लूँ,
"बेला महका___" में रेखा ने पहने थे ना ठीक वैसे !
आधी रात कमसकम मुझ से तो
महके !
खैर ! छोडो__ मुझे नहीं बनना किसी जैसा !
अब तुम सुनो !
गहरे आसमान के नीचे,
सिल्क का पितांबरी कद पहने आओगे ?
बुद्धु कद यानी पितांबर,
जो तपस्वी पहनते है !
अपनी भी ये मिलन तपस्या पूरी होगी अब !
तुम्हारे तपे काले बदन पर ये पीला रंग कम्माल का जँचेगा___!
भोर की एक-एक किरन चढे़गी,
और तब तक तुम भी मेरा धाना रंग लपेट लोगे___!
बेहयाई में डुबे हम___कसकर बँधे आगोश में !
कसम से वो शरमाती सुबह की लाली और महकती मैं !

#Shilpa___