तुम लेटते हो मतलब !
पसार देते हो अपनेआप को बिस्तर पर !
तभी मेरे पल्लू का एक छोर,
तुम्हारी पीठ पीछे फँस गया_____
अब मैं उठना चाहूँ भी तो कैसे ?
खींचना चाहा,
तो मैं ही घिर आईं तुम्हारी पहलू में ___
हायsss !
जालिम मेरे गालों ने तुम्हारा सीना छू लिया !
फिर क्या था !
अधखुले बदन तुम्हें सोते देखूँ तो रहा नहीं जाता___
बस तो मुझे प्यार आना ही था तुम पर शायर____!
तुम्हारा सीना इतनी धक्-धक् क्यूँ करता है जी ?
शायद मेरे छूने से मचलता है___
सहला लिया उँगलियों से उसे,
पर शरमा गया बेचारा____
जैसे कहता हो,
"मत करो हरकतें !
कहीं तुम्हारे वो जाग न जाए,
इन चुलबुलियों को रोक लो,
नहीं तो शायर काट खाए____!"
सारी मर्यादाओं से परे था मेरा बदन !
लगता था,
जाग जाओ तुम अभी, इसी वक्त,
और मैं सारी रात मरती रहूँ इस चौडे़ सीने पर !
पल्लू का एक छोर क्या फँसा शायर,
मैं तो पूरी फँस गई तुम में_____!
#Shilpa___
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