Friday, 19 July 2019

आँच

तुम्हारी गर्म आँच से मैं भी झुलसती हूँ !
सच कहूँ...?
इक तो ये काला रंग और कमाल का गर्म मिजाजी वो लाल रंग___
कॉम्बिनेशन ही तगडा बनाया है उपरवाले ने तुम्हारा_____!

क्यूँ करते हो अपने आप को इतना गर्म ?
पुछूँ तो कह देते हो___ तुम्हें देखकर !
मन करता है,
उँगलियाँ भींच दूँ जुल्फो में और कसकर खींच लूँ तुम्हें !

तब मेरा मन भी आपे से बाहर टूटने लगता है,
मन की बात बताऊँ शायर !
यहाँ किसे अकेले तड़पना भाँता है ?
फिर हो लेती हूँ तुम्हारी बाँहों की संगिनी !

तुम्हारी साँसों का यूँ जोर-जोर से मुझे बुलाना,
बहा ले जाता है मेरे बदन को उस ओर,
जहाँ अग्रीम क्षण अपना हो !
मिलना है हमें ऐसे उत्कट पल में,
जहाँ गरमाते हम दोनों पनप रहें हों,
अपनी-अपनी जडों समेत एक-दूसरे में_____

इस बीच शरारतें तो वाजिब है जनाब !
जो होठों से की जाए____!
शहद से भरे हम उँडे़ल दें उस अमृत को,
जो तन-मन से भिगता इक-इक बूँद टपकाए !

यहीं प्यार का अंतिम क्षण,
जो जिलाए रखता है हमें बार-बार !
फ़कत इक बार फिर से जान लूँ मैं भी ?
ये गरमाहट कहाँ से लाते हो तुम ?
तुम्हें देखकर न कहना जी !

सौ गुनाह मुआफ़ हो सकते है पर ये एक कभी नहीं !
सच बताना शायर !
_____ झूठ बिल्कुल नहीं !

#Shilpa____

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