तुम्हारा मूड़ कुछ खासा लगता है आज !
खास हो, तो ही तुम रबडी और जलेबी लाते हो_____
खुशबू से भरा मोगरे का गजरा भी,
गिले हरे पत्तों में बँधा आता है तुम्हारे साथ !
बेहद सुगंध____आहा कयामत !
आज वही सब तैयारी कर आए हो जी !
बताओ क्या बात हुई,
जो इतनी हरकतें एक साथ कर आए !
देखो छुपाना नहीं____!
ये कातिल नजरें और इश्क टपकाते लबोंवाला चेहरा,
बरसों पढ़ती आई हूँ____नकचढे़ !
तुम यूँ ही मेरे पीछे से भी गुजर जाओ ना,
तब भी तुम्हारे इश्किया साए को चूमना जानती हूँ मैं !
उस दिन भी तुम्हारे हाथ के कडे़ ने,
मेरे बालों को छेडा था____
जैसे तुम्हारे लब, मेरे लबों को छेड़ते आए हैं____
अब, क्यूँ ____? कैसे ?____कब ? ये न पूछना शायर !
शरम से मर जाऊँगी !
बस इतना ध्यान रहे,
आज की रात सब वही चाहती हूँ मैं, तुमसे !
उस रबडी में डूबती जलेबी की तरह___
कहीं मैं भी गर डूब गई तुम में___तो !
ये मोगरा भी जलेगा जी मुझ पर____
हँस दिए ना ! कातिल नजरों से____
अब जान लोगे मेरी रात तक !
#Shilpa____
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