किसी ऋषि जैसे हो तुम,
ध्यान,लक्ष्य जीवन है तुम्हारा____
और लेखन इक आराधना____
कईं बार भूल जाते हो कि,
दुनिया भी किसी का नाम हो सकता है____
सोचती हूँ गर तुम न होते तो,
उम्र नहीं कटती मेरी_____
दिल की दराज़ में तुम्हें बंद न करती,
तो जान के भी तुम्हें अनजान बना देती____
पर नहीं कर सकती ऐसा,
क्योंकि,
तुम ठहराव हो मेरी जिंदगी का शायर !
तुम कहो वहाँ ठहर जाऊँ मैं इश्क के साथ____
मैंने तुम्हारी तपस्या भंग कर दी है___
ऋषिमुनी !
तुम्हारे अंग से लिपटा भस्म,
मेरे सिंदूर की चमक से फीका पड़ गया है____
तुम्हारे अलख़ का इक नाद,
मेरे शरीर के तार छनछना देता है____
सुनो !
मेरे मन के शिवाला में,
तुम्हारा स्थान इक ऋषि का ही होगा____
धीर-गंभीरता से भरा तपस्वी,
भले ही मैंने भंग कर दी हो उसे,
पर फिर भी शायर का लिबास हमेशा पहने रहना____
बहुत जँचता है तुम पर____
#Shilpa____
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