Tuesday, 12 March 2019

शहद

दिन में कितनी शायरी लिखते हो जी___?
कहाँ से लाते हो लफ़्जों को ?
हर एक में मुहब्बत कूट-कूटकर भर देते हो !

कितनों की प्यास बुझाते हो,
पता भी है तुम्हें__?

तुम्हें पढ़ते ही रोमांस जागता है जी !

पर एक बात है जरुर !
जब मेरे करीब आते हो___
हाएsss ! कमाल के कड़वे लगते हो___!
तुम तो जानते हो मेरी मिठास ?
शहद हूँ शहद____!

खुदाया !
भला हो उस सिगरेट का,
जो तुम में कड़वापन छोड़ जाती है !
कमसकम सारी रात तुम्हें तो डुबाए रख सकती हूँ ______शहद में ! ;-)

😜😃

#Shilpa

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