Monday, 18 March 2019

आशिक

इतनी भी अदा से मत देखो मुझे__
मिजाज बदलते हैं मेरे___
समझे मेरे चिड़चिडे़ आशिक !

बाहों में भर लिया है,
तो एक बात कहूँ____जी !
बाहर चलते हैं कहीं ?____मूड है आज !

लफ़्जों की लेन-देन से,
जो दाद मिली थी ना तुम्हें___याद है ?
उसी से एक गहरे हरे रंग की साडी लाए थे तुम मेरे लिए_____
मन करता है वहीं पहनकर निकलूँ तुम्हारे साथ____इश्क जो है तुमसे मियाँ !

आज आते वक्त मोगरा लाए थे तुम ?
हाँ लाए ही थे ! महक जो गई थी तुम्हारे आते ही मैं____
हररोज की तरह उन उँगलियों से ही मेरे जुडे़ में सजाना जी !
जिसमें कमीनी सिगरेट,
और उस चुडै़ल को पकड़ते आए हो____!

देखो, गुस्सा नहीं होना...हाँ !
चुडै़ल है____तो बस है वो !
तुम्हारी उँगलियों में कैद होकर,
पता नहीं तुमसे क्या-क्या लिखवाती रहती है ?
बस___इधर-उधर की पंचायतों-भरा इश्क !
बेक्कार कहीं की !
बडी तोफ़ बनी फिरती है कागज़ पर !

हाँ तो बताओ ?
सांझ ढलते ही चलेंगे ?
मुझे कुछ नहीं चाहिए____जी !
भुट्टा,मूँगफलियाँ,चाट_____कुछ भी नहीं !
बस एक करारी....किस की भूख है जनाब !

यूँ निगाहों में हँसना बंद करो____इश्किए !
शरम से रहा नहीं जाता फिर___
तुम्हारे इन काले होंठों को पिना है___
मेरे ज़हरीले साँप !

तुम्हारा ये काला ज़हर,
सबूत है मेरे बिखकर जीने का !
हक़ से मरना कबूल है मुझे____
सिर्फ तुम में____!

आओ चलें____
मेरी बक-बक में सांझ हो भी गई___मेरे आशिक !

#Shilpa____

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