Sunday, 10 February 2019

इंतकाल

ये अटकना अजीब है !
पता है____अब बचूँगी नहीं !
सालों पहले अटकी थी ये जान
तब से तुम्हारे नाम कर दी थी !

देखो मिट रही हूँ आज,
हमेशा के लिए____!
मरने का खौफ़ नहीं है मुझे__
जानते हो ना तुम !

मेरे गरम तवे !
मैं मरना नहीं चाहती !
तुम्हें खोना नहीं चाहती____

मेरे शायर !
तुम्हारी शायरी में मेरा कोई तो इलाज होगा ?
याद करो___कहीं कुछ लिखा हो तुमने ?

मुझे जीना है दीवाने !
तुम्हारी बनकर____
हर पल करीब____और करीब !

एक बार कागज़-कलम से दूर,
तुम मेरे बने होते मौला !
मेरी हर दुआ में चुमती तुम्हें___

बाहों में ले लो___
नज़दीक___और नज़दीक !
वक्त इजाज़त ले रहा है मुझसे !

हाँ, जाते-जाते एक और बात___
तुम्हारा वह सफेद शर्ट____
अलमारी में बराबर सामने है___
वो निशानी तुम्हारे जिस्म होने की____मेरे लिए !
गुस्सा होते थे ना___
तब वो सफे़द जिस्म मेरा हुआ करता था___
खूब लिपटकर उसे मना लेती मैं,
जैसे सच में तुम्हें मना रही हूँ !

बात सुनो !
मरते की ख़्वाहिश पूरी करोगे ?
उस सफे़द जिस्म को मेरा कफ़न बना दोगे ?______

हकीकत में ना सही,
कबर में तो मुझसे लिपटे रहोगे___?

मना न करना शायर !
चूम लो मुझे_____मौला !

अल्लाह हाफिज !

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