Wednesday, 18 September 2019

नन्ही-सी जान

तुम्हारी खुशबू से,
महक जाती हूँ मैं___!
करीब न हो जिस वक्त तुम,
तड़प जाती हूँ मैं___!
हाल कुछ ऐसा होता है,
जल बिन मछली का___!
न हो पास शौहर,
तो श्रृंगार किस काम का ?

लहरें नहीं रह सकती कभी,
सागर से जुदा___!
रेत भी मानती है,
खारे पानी को ही खुदा___!
जान लो या समझ लो,
मेरी इस उलझन को___!
न सताया भी करो,
इस नन्हीं-सी जान को___!

#Shilpa___

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